मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा प्रताप के बारे में रोचक तथ्य जो आपको जरूर पता होने चाहिए....
महाराणा
प्रताप का नाम सुनते ही शरीर में ऊर्जा का संचार हो जाता है और हो भी क्यों ना उन्होंने
जिस तरह से मुग़ल सम्राट अकबर से वीरता से संघर्ष किया और मरते दम तक अकबर की अधीनता
स्वीकार नहीं की उसकी मिसाल आज तक पेश की जाती है |
भारतीय इतिहास के संघर्ष में राजपूताने का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है जिसमे मेवाड़ की बात सबसे पहले की जाती है मेवाड़ में ही 15 मई 1540 को कुम्भलगढ़ दुर्ग में एक वीर योद्धा का जन्म हुआ जो की आगे चलकर भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप के नाम से प्रसिद्ध हुआ | उनके पिता महाराणा उदयसिंह व माता महाराणी जयवंताबाई थी | वो महान शासक राणा सांगा के पौत्र थे |
महाराणा प्रताप एक हिन्दू शासक थे जब उन्होंने सत्ता संभाली तब दिल्ली में मुग़ल शासक अकबर का राज था उसने कई रियासतों को अपने अधीन कर लिया था और वह सम्पूर्ण भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहता था | लेकिन अकबर महाराणा प्रताप की वीरता से भली भांति परिचित था इसलिए उसने महाराणा प्रताप से बिना युद्ध किये ही उन्हें अपनी अधीनता स्वीकार करवाना चाहता था इसलिए अकबर ने महाराणा प्रताप को समझने के लिए 4 राजदूत नियुक्त किये लेकिन प्रताप ने चारो राजदूतों को निराश करते हुए अकबर की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया जिसके फलस्वरूप हल्दीघाटी का युद्ध हुआ | वैसे देखा जाये तो हल्दी घाटी के युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से कोई विजयी नहीं हुआ लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से विजय महाराणा प्रताप की ही हुई | जब हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को शुरू हुआ तब ये माना जा रहा था की अकबर की विशाल सेना के आगे मुट्ठीभर राजपूत सैनिक कितनी देर टिक पाएंगे पर ये युद्ध पूरे एक दिन चला और राजपूत सैनिको ने मुग़ल सेना के छक्के छुड़ा दिए थे |
महाराणा प्रताप के बारे में रोचक तथ्य ......
- महाराणा प्रताप का बचपन का नाम कीका था | उनका बचपन भील समुदाय के बीच गुजरा था और भील समुदाय के लोग अपने बच्चे को कीका ही पुकारते थे |
- महाराणा प्रताप एक बलशाली योद्धा थे उनकी लम्बाई 7 फ़ीट 5 इंच थी जबकि उनका वजन 110 किलो था | वो एक रिष्ट पुष्ट शरीर के धनी थे विरोधी उन्हें देख कर ही भय से काँप उठते थे |
- महाराणा प्रताप अपनी शारीरिक योग्यता के अनुसार ही हथियार भी रखते थे उनका एक भाला 80 किलो का था जिसे वो बड़ी आसानी से चला लेते थे जबकि उनकी छाती के कवच का वजन लगभग 72 किलो था |
- महाराणा प्रताप 200 किलो से ज्यादा वजनी हथियार लेकर युद्ध करने के जाते थे जिसकी आज के युग में कल्पना करना भी नामुमकिन सा लगता है |
- महाराणा प्रताप ने राजनीतिक गठबंधनों के चलते कुल 11 शादियाँ की थी |
- महाराणा प्रताप का घोडा चेतक बहुत ही समझदार और वफादार था जब महाराणा प्रताप हल्दीघाटी के युद्ध में घायल हो गए थे तब चेतक ने उन्हें बचाने के लगभग 25 फ़ीट लम्बे नाले से कूद गया था | चेतक ने हर युद्ध में महाराणा प्रताप का बखूबी साथ निभाया था | चेतक की वीरता और वफादारी का जीता जागता उदाहरण हल्दीघाटी में बनी हुई चेतक की समाधी पर मिलता है |
- चेतक के सर पर युद्ध के समय हाथी का मुखौटा लगाया जाता था ताकि दुश्मन सेना के हाथी कंफ्यूज हो सके |
- इतिहासकारो के अनुसार अकबर ने महाराणा को अपने अधीन करने के लिए 30 वर्षो तक प्रयास किया था लेकिन उसे सफलता नहीं मिली |
- अकबर महाराणा प्रताप की वीरता से भली भांति परिचित था इसीलिए उसने एक बार कहा था की अगर महाराणा प्रताप और जयमल उसके साथ मिल जाये तो वो सम्पूर्ण विश्व का सबसे शक्तिशाली शासक बन सकता है |
- महाराणा प्रताप और अकबर एक दूसरे के प्रतिद्वंदी थे लेकिन ये लड़ाई सिद्धांतो और मूल्यों की थी | जब महाराणा प्रताप वीरगति को प्राप्त हुए थे तब अकबर भी रो पड़ा था |
- महाराणा प्रताप ने मायरा की गुफा में काफी दिन सिर्फ घास की रोटी खाकर गुजारे थे |
- महाराणा प्रताप की तरफ से हल्दी घाटी युद्ध में लड़ने वाले एक मात्र मुस्लिम हकीम खां सूरी थे |
- हल्दीघाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ तलवारे पायी जा रही है आखिरी बार वहाँ से सन 1985 में तलवारे पायी गयी है |
- कहा जाता है की एकबार अब्राहम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे तब उन्होंने अपनी माँ से पुछा माँ आपके लिए हिंदुस्तान से क्या लाऊँ तब उनकी माँ ने कहा की उस हल्दीघाटी की एक मुठ्ठी मिट्टी ले आना जिसका राजा इतना वफादार था की उसने आधे हिंदुस्तान के बदले में अपनी मातृभूमि को चुना |
- महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 को मेवाड़ में हुई थी वो शिकार करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे जिसके चलते उनका निधन हो गया था |
हमें इतिहास
में आज तक पढ़ाया गया है की अकबर एक महान शासक था | अब ये समझ से बाहर है की महानता
की उचित परिभाषा क्या है अकबर ने रियासतों पर अधिकार करने के लिए नीति व अनीति दोनों
का सहारा लिया और हजारो बेगुनाहो का नरसन्हार किया इसके बावजूद भी अकबर को इतिहास में
महान शासक बताया गया है वही दूसरी और महाराणा प्रताप ने अपने प्राणो की परवाह न करते
हुए हमेशा हजारो लोगो की जान बचाई लेकिन वो महान नहीं और उन्हें इतिहास के पन्नो में
वो सम्मान और पद नहीं मिला जिसके वो वास्तव में हकदार थे | अब सवाल ये उठता है की आखिर
ऐसा क्यों ? इसका जवाब ये है की भारत का इतिहास अंग्रेजो और कम्युनिस्टों ने लिखा है
और उन्होंने ने उन लोगो को महान बताया है जिन्होंने भारत की भोली भाली और मासूम जनता
पर हमेशा जुल्म किये जबरदस्ती इस्लामीकरण करने की कोशिश की |
आप लोगो की
इस बारे में क्या राय है क्या महाराणा प्रताप को इतिहास में अब वो सम्मान मिलना चाहिए
जिसके वो वास्तव में हक़दार थे | कमेंट करके जरूर बताये | जय हिन्द वन्दे मातरम !!
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